अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है: देहरादून में लेखक शशि रंजन कुमार ने रखे विचार
“अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को आकार देता है। आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता यही है कि हम इसकी सुंदरता और […]









