पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डॉ. धन सिंह रावत जी के मध्य सार्थक संवाद
उत्तराखंड की शिक्षा, संस्कार, युवा सशक्तिकरण और सतत विकास के विविध आयामों पर हुआ सार्थक विमर्श
पारदर्शी व्यवस्थाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवाओं के विश्वास को सशक्त बनाने पर जोर देने की जरूरत
देवभूमि में शिक्षा और संस्कारों के नए आयामों पर मंथन
ऋषिकेश, उत्तराखंड, 20 जुलाई। उत्तराखंड सरकार के माननीय कैबिनेट मंत्री, शिक्षा (बेसिक, माध्यमिक, संस्कृत, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा) एवं सहकारिता विभाग, श्री डॉ. धन सिंह रावत जी जी ने आज परमार्थ निकेतन में परमाध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट कर उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था, संस्कार आधारित शिक्षा, युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास एवं सतत विकास के विविध आयामों पर सार्थक संवाद किया।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि नेतृत्व जैसा होता है, नीतियां भी उसी दिशा में आकार लेती हैं और फिर राष्ट्र की नियति भी उसी के अनुरूप बनती है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवस्था की सफलता के लिए नियत का शुद्ध और संकल्प का दृढ़ होना आवश्यक है। आज भारत को ऐसा नेतृत्व प्राप्त है, जिसकी नीयत राष्ट्रहित में है और नीतियां विकास, विश्वास एवं जनकल्याण को समर्पित हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन निर्माण, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का आधार है। उत्तराखंड देवभूमि है, जिसने सदैव ज्ञान, तप, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना की धारा से विश्व का मार्गदर्शन किया है। आज आवश्यकता है कि शिक्षा के माध्यम से युवाओं में ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, कर्तव्यबोध, सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना भी विकसित हो।

पूज्य स्वामी जी महाराज ने कहा कि युवा भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और सपनों को सही दिशा प्रदान करना समाज और सरकार दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसी व्यवस्थाओं का निर्माण होना चाहिए जिनसे प्रत्येक युवा को यह विश्वास हो कि उसकी मेहनत, योग्यता और प्रतिभा को उचित अवसर और सम्मान मिलेगा।
उन्होंने कहा कि विश्वास किसी भी मजबूत व्यवस्था की नींव होता है। सरकार और युवाओं के बीच संवाद, सहयोग और विश्वास का सेतु जितना मजबूत होगा, उतना ही प्रदेश का भविष्य उज्ज्वल होगा। नीतियों और प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार, पारदर्शिता, समयबद्धता और संवेदनशीलता से युवाओं के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
पूज्य स्वामी जी महाराज ने कहा कि परीक्षा और चयन प्रक्रियाएं युवाओं के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव होते हैं। इसलिए इन व्यवस्थाओं में पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता का होना अत्यंत आवश्यक है। जब युवा यह अनुभव करेंगे कि व्यवस्था उनकी मेहनत और योग्यता का सम्मान करती है, तब उनका विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में अद्भुत क्षमता, प्रतिभा और सृजनात्मक ऊर्जा है। आवश्यकता है कि उन्हें आधुनिक शिक्षा, तकनीकी कौशल, उद्यमिता, नवाचार और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ा जाए। शिक्षा व्यवस्था ऐसी हो जो युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला, आत्मनिर्भर और समाज निर्माण में योगदान देने वाला बनाए।
माननीय कैबिनेट मंत्री श्री धनसिंह रावत जी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र को और अधिक सशक्त, आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर प्राप्त हों।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कारों का समन्वय आवश्यक है। उत्तराखंड की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मंत्री जी ने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं को समझते हुए शिक्षा नीति, कौशल विकास और रोजगारपरक कार्यक्रमों को प्रभावी बनाया जा रहा है। सरकार युवाओं के सुझावों और अपेक्षाओं को महत्व देती है तथा एक ऐसी व्यवस्था के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है जिसमें हर युवा स्वयं को सहभागी और सशक्त महसूस करे।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि जब शिक्षा में संस्कार, नीति में संवेदनशीलता और व्यवस्था में पारदर्शिता का समावेश होता है, तब एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण होता है। उन्होंने आह्वान किया कि सरकार, शिक्षण संस्थान, समाज और युवा मिलकर उत्तराखंड को शिक्षा, संस्कार और सतत विकास का आदर्श मॉडल बनाएं।
