शरद पूर्णिमा आत्मिक जागरण और ईश्वर के प्रति समर्पण का पर्व: स्वामी राम भजन वन महाराज
हरिद्वार। श्री तपोनिधि पंचायती अखाड़ा निरंजनी, मायापुर, हरिद्वार से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संत स्वामी राम भजन वन जी महाराज ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक जागरण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा केवल चंद्रमा की पूर्णता का पर्व नहीं, बल्कि मन की निर्मलता और आत्मिक उन्नति का भी पावन अवसर है।
शरद पूर्णिमा की चंद्रमयी रात्रि मनुष्य को अहंकार, क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसे विकारों का त्याग कर जीवन में करुणा, विनम्रता और प्रेम अपनाने की प्रेरणा देती है। वैष्णव परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला इस पर्व का विशेष आध्यात्मिक आकर्षण है, जो जीवात्मा के परमात्मा के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।
स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि कोजागरी पूर्णिमा के अवसर पर माँ महालक्ष्मी की आराधना, भजन-कीर्तन, ध्यान और प्रभु के नाम का स्मरण करने की परंपरा व्यक्ति को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ती है। वास्तविक समृद्धि केवल भौतिक संपन्नता में नहीं, बल्कि संतोष, सदाचार, सेवा और निर्मल विचारों में निहित है।
स्वामी राम भजन वन महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे शरद पूर्णिमा पर अपने जीवन में प्रेम, शांति, सेवा और सद्भाव को अपनाने का संकल्प लें। ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा और मानवता की सेवा से ही जीवन को सार्थक एवं आनंदमय बनाया जा सकता है।















Leave a Reply